Selection Of Improved Seeds For Potato Cultivation आलू की खेती के लिए उन्नत बीजों का चयन

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आलू की उन्नत किस्म के बीज का चयन pics

Selection Of Improved Seeds For Potato Cultivation आलू की खेती के लिए उन्नत बीजों का चयन

सर्दियों का मौसम रबी की फसल की बुवाई के लिए उपयुक्त होता है। रबी की फसल के अंतर्गत गेहूँ, चना , मटर, आलू , सरसों आदि आते हैं। इन फसलों को पानी के अतिरिक्त ठन्डे मौसम की आवश्यकता होती है। हमारे देश में आलू की खेती केरल और तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों में की जाती है। हालाँकि भारत में आलू की उपज लगभग  152 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है, जो कि अन्य देशों की तुलना में कम है। आलू की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न राज्यों की जलवायु के हिसाब से आलू के उन्नत बीजों को विकसित किया गया है। किसान भाई अपने क्षेत्र के लिए विकसित की गयी आलू के बीज का चयन करके बुवाई कर सकते हैं। जलवायु के आधार पर आलू के बीज का चयन करने से पैदावार में बढ़ोत्तरी हो सकेगी।

आलू की खेती के लिए बलुई -दोमट मिटटी उपयुक्त होती है। खेतों में जल -भराव होंने से आलू की फसल के लिए नुकसानदायक होता है। अतः आलू की बुवाई करते समय जल निकासी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आलू की फसल की बुवाई की तैयारी सितम्बर – अक्टूबर महीने से शुरू कर दी जाती है। केंद्रीय आलू अनुसन्धान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर विजय कुमार गुप्ता के अनुसार “राज्यों की जलवायु के आधार पर विभिन्न राज्यों में अलग -अलग समय पर आलू की बुवाई शुरू की जाती है। इसी को देखते हुए प्रत्येक क्षेत्र के लिए आलू के उन्नत बीज को विकसित किया जाता है।” इसके अतिरिक्त आलू के बीजों का चयन करते समय रोग प्रतिरोधी किस्म के बीजों का हीं चुनाव करना चाहिए। आइये जाने क्षेत्र के अनुसार आलू के उन्नत किस्म के बीज का चयन करने की जानकारी।

  Advanced Potato Variety   आलू की उन्नत बीजों की किस्म 

क्षेत्र की जलवायु के आधार पर विकसित की गयी आलू के उन्नत किस्म निम्नलिखित हैं :

  • कुफरी अलंकार

आलू की यह किस्म उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। कफुरी अलंकार किस्म के आलू की बुवाई करने पर फसल लगभग 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म के बीजों के उपयोग से औसत उत्पादन 200 से 250 हेक्टेअर प्राप्त होती है। इस किस्म के बीज से तैयार फसल को झुलसा रोग से प्रभावित होने की सम्भावना अधिक होती है। इसके अतिरिक्त अन्य विषाणु जनित रोगों से भी बचाव की आवश्यकता होती है।

  • कुफरी अरुण 

इस किस्म को उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्र के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म का बीज पछेती झुलसा रोग के प्रतिरोधी होता है। इस किस्म के बीजों की बुवाई करने से आलू का औसत पैदावार 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होता है।

  • कुफरी आनंद     

इस किस्म के आलू की बुवाई करने से औसत उत्पादन 300 से 400 क्विंटल  प्रति हेक्टेअर होता है। इस किस्म पर पाला/कुहरा का असर नहीं होता है। जिसके कारन सर्दियों में अछि उपज प्राप्त होती है। इस किस्म के आलू की बुवाई करने पर पछेती झुलसा रोग लगने की सम्भावना नहीं होती है।

  • कुफरी बादशाह 

इसे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में खेती के लिए विकसित की गयी है। इस किस्म का उपयोग करने से आलू की फसल लगभग 100 से 135 दिन में तैयार होता है तथा उत्पादन औसत 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होता है। इस किस्म की बीजों की बुवाई करने से पछेती झुलसा और अगेती रोग से फसल को नुकसान नहीं पहुँचती है।

  • कुफरी अशोक 

ये किस्म भी उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए विकसित की गयी है। इसके उपयोग से औसत आलू का उत्पादन 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। किन्तु आलू की यह किस्म को फसली रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग करना आवश्यक होता है। क्योंकि इस किस्म की बीज से तैयार फसल को पछेती झुलसा, सिस्ट निमेटोड और अन्य वायरस जनित रोगों से बचाने की आवश्यकता होती है।

  • कुफरी बहार 

इस किस्म के उपयोग से औसत उत्पादन 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। इसे भी उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म के बीज का इस्तमाल करने पर पछेती झुलसा, अगेती और अन्य कई वायरस जनित रोगों से फसलों को बचाने की जरुरत होती है।

  • कुफरी चिप्सोना -1, कुफरी चिप्सोना -2 और कुफरी चिप्सोना -3 

ये तीनों किस्म को उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म के आलू का उपयोग चिप्स और फ्रेंच फ्राइज बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इन तीनों किस्म के आलू की बुवाई करने पर औसत 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर आलू का उत्पादन प्राप्त होता है। इनमें से कुफरी चिप्सोना -1 पछेती झुलसा और अन्य वायरस जनित रोगों से नुकसान पहुँचने का डर रहता है। कुफरी चिप्सोना -2 किस्म पर पछेती झुलसा रोग लगने का डर नहीं होता है एवं पाला को सहने की क्षमता होती है। जिससे सर्दियों में पैदावार अच्छी होती है। कुफरी चिप्सोना -3  इस किस्म पर पछेती झुलसा रोग का असर नहीं होता है। इसे लम्बे समय के स्टोर करके रखा जा सकता है।

  • कुफरी देवा 

इस किस्म के बीजों के उपयोग से औसत उत्पादन 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। इसे किस्म को उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म पर पाला का असर नहीं होता है इसके अलावा इसे लम्बे समय के लिए स्टोर करके रखा जा सकता है। इस किस्म के प्रयोग से फसल 120 से 125 दिन में तैयार होती है।

  • कुफरी जीवन, कुफरी गिरिराज

ये दोनों किस्म उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्र के लिए विकसित की गयी है। कुफरी गिरिराज की बुवाई से औसत उत्पादन 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। कुफरी जीवन किस्म की बुवाई करने से औसत उत्पादन 100 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। इस किस्म पर पछेती झुलसा रोग का असर नहीं होता है।

  • कुफरी जवाहर 

इस किस्म के बीजों के उपयोग से औसत उत्पादन 200 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। इसे किस्म को उत्तर भारत के मैदानी और पठारी क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म की बीज से फसल 90 से 110 दिन में तैयार हो जाती है।

  • कुफरी गिरधारी 

इस किस्म के उपयोग से औसत उत्पादन 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है। इसे भारत के पहाड़ी इलाकों के लिए विकसित किया गया है इस किस्म पर पछेती झुलसा रोग का असर नहीं होता है।

  • कुफरी ज्योति 

इस किस्म को  पहाड़ी, पठारी और मैदानी इलाकों में खेती के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके उपयोग से औसत आलू का उत्पादन 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है।

  • कुफरी खासिगारो

इस किस्म को उत्तर -पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म की बुवाई से औसत उत्पादन 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है।

  • कुफरी गरिमा 

इस किस्म की आलू की बीज को उत्तर प्रदेश , बिहार और पश्चिम बंगाल में खेती के लिए विकसित किया गया है। इस किस्म के उपयोग से औसत उत्पादन 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है।

  • कुफरी कंचन 

इस किस्म को उत्तर बंगाल की पहाड़ियों और सिक्किम में खेती के लिए विकसित किया गया है। इसके उपयोग से औसत आलू का उत्पादन 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर प्राप्त होती है।

  • कुफरी गौरव 

इस किस्म के आलू की बीज को पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में खेती के लिए विकसित किया गया है।

आलू की खेती के लिए उन्नत बीजों के प्रकार की जानकारी के स्त्रोत के लिए लिंक पर क्लिक करिए।

अधिक जानकारी के लिए विडियो देखिये For more information watch video below:

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