म.प्र.- पशुपालन योजना । MP- Pashupaalan yojana

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म.प्र.- पशुपालन योजना । MP- Pashupaalan yojana

पशु पालन योजना का उद्देश्य पशुओं की नस्ल में सुधार करना एवं प्रदेश दूध, डेरी, मांस एवं अन्य पशु से सम्बंधित उद्योग का विकास करना है। इस योजना के माध्यम से पशुओं के नस्ल में सुधार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसका उद्देश्य पशुपालकों की आर्थिक स्तर में वृद्धि करना है। इस योजना अंतर्गत प्रदेश के पशुपालको को अपने  पशुओं के नस्ल में सुधार हेतु राज्य सरकार की ओर से उन्नत नस्ल के पशु सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है।

नंदीशाला योजना (Nandishala Yojana):

इस योजना का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत स्तर पर प्रदेश के पशुपालकों को अपने गायों  के नस्ल में सुधार हेतु प्राकृतिक गर्भाधान सेवाओं हेतु  उन्नत नस्ल के सांड -साहीवाल, थरपारकर,हरियाणा, मालवी, केंकथा आदि सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।

योजना के लाभ हेतु पात्रता (Yojana ke labh hetu Patrta)

  • राज्य के सभी पशुपालक जिनके पास पर्याप्त कृषि भूमि के साथ न्यूनतम पांच गाय हों।
  • जिनके पास कृषि भूमि नहीं परन्तु 20 गाय हो।

योजना अंतर्गत सब्सिडी (Yojana Antrgt Sabsidi):

योजना के तहत नदिशाला स्थापित करने की कुल लागत रूपए 25720 है सरकार द्वारा कुल लागत का 80% दिया जायेगा 20% राशि लाभार्थी को अपने पास से लगाना होगा।

योजना के लाभ हेतु लाभार्थी की चयन प्रक्रिया (Yojana ke labh hetu Labhaarthi ki chyan Prakriya): 

  • आवेदक को अपने ग्राम पंचायत में आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा।
  • खंड स्तरीय पशु चिकित्सा विकास अधिकारी तथा जिला पंचायत की कृषि स्थायी समिति द्वारा आवेदकों का चयन किया जायेगा।
  • चयनित लाभार्थी को पशु चिकित्सा विभाग से अनुबंध करना अनिवार्य होगा।

म.प्र. बकरी पालन योजना  (MP Bakri Paalan Yojana)

देश के बकरियों के नस्ल में सुधार हेतु प्रत्येक इच्छुक बकरी पालक को एक उन्नत नस्ल का बकरा प्राकृतिक गर्भाधान सेवा के लिए उपलब्ध कराया जायेगा।

योजना का उद्देश्य (Yojana ka uddeshy):

  • मांस एवंम दूध के उत्पादन में वृद्धि करना।
  • बकरियों के नस्ल में सुधार के माध्यम से बकरी पालक के आय में वृद्धि करना।

योजना के लिए पात्रता (Yojana ke Liye Patrta):

  • मध्य प्रदेश के सभी वर्ग के भूमिहीन, लघु एवं सीमांत कृषक,मजदूर।
  • बकरी पालन का अनुभव आवश्यक है।
  • योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक के पास न्यूनतम 5 बकरी होना आवश्यक है।

योजना अंतर्गत सब्सिडी (Yojana antrgt Sabsidi):

  • इकाई स्थापित करने की कुल लागत रूपए 77456
  • अनुसूचित जाति/जन जाति के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी कुल लागत का 50%
  • सामान्य वर्ग के लिए कुल लागत का 25%

बकरी पालन योजना में आवेदन एवं चयन प्रक्रिया (Bakri Paalan Yojana mein Aavedn Evam Chayan Prakriya):

  • आवेदक को अपने ग्राम सभा में आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
  • आवेदकों का चयन जनपद पंचायत सभा एवं जिला पंचायत कृषि स्थायी समिति द्वारा अनुमोदन के बाद सम्बंधित बैंक द्वारा ऋण की सुविधा उपलब्ध होगी।

सूकरों के नस्ल में सुधार हेतु योजना (Sukar ke Nasl mein Sudhar hetu Yojana):

  • इस योजना के तहत सूकरो के नस्ल में सुधार हेतु अनुसूचित जाति के सूकर पालक को उन्नत नस्ल का एक मिडिल  सफेद यार्कशायर एवं अनुसूचित जनजाति के सूकर पालक को दो मिडिल सफेद यार्कशायर नस्ल के सूकर सब्सिडी दर पर प्राकृतिक गर्भाधान सेवा हेतु प्रदान किये जाने का प्रावधान किया गया है।
  • योजना का उद्देश्ययोजना का संचालन प्रदेश के केवल अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिले में किया जायेगा।

योजना का उद्देश्य (Yojana ka uddeshy):

देशी /स्थनीय सूकर के नस्ल में सुधार करना है।

योजना अंतर्गत सब्सिडी (Yojana Antrgt Sabsidi):

  • इकाई स्थापित करने की कुल लागत रूपए 15000
  • सरकार द्वारा सब्सिडी कुल लागत का 75%

आवेदन हेतु पात्रता (Aavedan Hetu Patrta):

मध्य प्रदेश राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति।

आवेदन एवं चयन प्रक्रिया (Aavedn ki Prakriya):

  • आवेदन जिले के ग्राम सभा में प्रस्तुत करना होगा।
  • ग्राम सभा से पास होने के बाद जिला ग्राम पंचायत से अनुमोदन फिर अंत में जनपद पंचायत की कृषि स्थायी समिति की बैठक से अनुमोदन के पश्चात बैंक से ऋण की सुविधा प्राप्त होगा।

कुक्कुट पालन योजना (Kukkut Paalan Yojana):

इस योजना के तहत कडकनाथ नस्ल के कुक्कुट की जनसँख्या को बढ़ाने  के लिए प्राकृतिक गर्भाधान हेतु 28 दिन के 40 कडकनाथ चूजे सब्सिडी दर पर उपलब्ध करना है।

योजना का उद्देश्य (Yojana ka Uddeshy):

कुक्कुट पालकों के आर्थिक स्तर में सुधार लाना है।

योजना का क्रियान्वयन (Yojana ka kriyanvayan):

प्रदेश के केवल अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिले में सचालन करना है।

योजना हेतु पात्रता (Yojana hetu Patrta):

अनुसूचित जनजाति के कुक्कुट पालक।

योजना अंतर्गत सब्सिडी (Yojana Antrgt Sabsidi):

  • योजना अंतर्गत इकाई स्थापित करने की कुल लागत रूपए 4400
  • सरकार द्वारा सब्सिडी कुल लगत का 80%
  • लाभार्थी को देना होगा 20%

आवेदन एवं चयन प्रक्रिया (Aavedn Evam Chayan Prakriya):

  • आवेदक को अपने ग्राम सभा में आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
  • फिर जिला ग्राम पंचायत से अनुमोदन प्राप्त होने पर
  • अंत में जनपद कृषि स्थायी समिति के बैठक में अनुमोदन प्राप्त होने के बाद
  • सम्बंधित बैंक से ऋण प्रप्त करने की सुविधा

वत्स पालक प्रोत्साहन योजना (Vats Paalak Protsahan Yojana):

इस योजना के तहत उन्नत नस्ल के गाय हैं एवं उनका दूध उत्पादन उस नस्ल के अन्य गायों से 30% अधिक है, और उनका वत्स उच्च अनुवांशिक क्षमता वाले भारतीय नस्ल के सांड के वीर्य से प्राकृतिक अथवा कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पैदा हुआ है। ऐसी गायों के पशुपालकों को प्रोत्साहन  हेतु रूपए 5000 हज़ार का पुरूस्कार दिया जाने का प्रावधान किया गया है। उनके वत्सो के संरक्षण हेतु औषधि/पशु आहार के लिए 0-4 महीने की उम्र तक  रूपए 500 सरकार द्वारा दिए जाने का निर्धारण किया गया है।

योजना का उद्देश्य (Yojana ka Uddeshy):

  • भारतीय नस्ल के गोवंश के पशुपालको को बढ़ावा देना है।
  • उनके पास उपलब्ध उच्च अनुवांशिक गुण वाले वत्स का संरक्षण एवं वृद्धि के लिए प्रोत्साहित करना है।

योजना की पात्रता (Yojana ki Patrta):

प्रदेश के सभी वर्ग के गौ पशुपालकों के लिए

योजना अंतर्गत सब्सिडी (Yojana Antrgat Sabsidi):

  • योजना के तहत इकाई स्थापित करने की लागत रूपए 1700।
  •  सभी पात्र आवेदक को पंजीकरण पशु विभाग द्वारा किया जाएगा फिर गायों के तीन बार दोहन के पश्चात  दूध की मात्रा के उच्च क्रम के आधार पर उपलब्ध बजट के अनुसार सब्सिडी की राशि निर्धारित किया जायेगा।

आवेदन के चयन की प्रक्रिया (Aavedn ke Chayan ki Prakriya):

जिला उप संचालक पशु चिकित्सक समिति के अध्यक्ष एवं दो पशु चिकित्सा सहायक/ पशु विस्तार अधिकारी सदस्यों के द्वारा चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

पशुपालन योजना का उद्देश्य प्रदेश में पशु पालन उद्योग को बढावा देना है तथा मांस दूध एवं डेरी उद्योग का विकास करना है।

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