Button Mushroom ki kheti kaise kare बटन मशरुम की खेती कैसे करें

button mushroom ki kheti

Button Mushroom ki kheti kaise kare बटन मशरुम की खेती कैसे करें

मशरूम को प्राचीनकाल से खाद्य पदार्थ के रूप में  उपयोग किया जाता रहा है। ऋग्वेद में मशरूम के पोषक तत्व के महत्त्व का वर्णन किया गया है। यूनानियों ने इसे ईश्वर के भोजन की संज्ञा दी है। शाकाहारियों के पोषण आवश्यकता की पूर्ति की दृष्टि से मशरूम को एक सुपरफूड कहा जा सकता है।

मशरूम का उत्पादन विभिन्न फसलों के अवशेषों पर किया जाता है। जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम करने में भी सहायता मिलती है। इसके फसल के उत्पादन के बाद अवशेषों को पशु आहार , मृदा सुरक्षा एवं फसलों में लगने वाले कीट रोग प्रबंधन में उपयोग किया जाता है।

हमारे देश में मुख्यतः चार प्रकार के मशरूम की खेती की जाती है – बटन मशरूम, ढिंगरी मशरूम, दूधिया मशरूम और पुआल मशरूम। आज हम इस लेख के माध्यम से बटन मशरूम की खेती करने से सम्बंधित जानकारी प्राप्त करेंगे।

 

Required Climate for Farming खेती के लिए आवश्यक जलवायु

मुशरूम की खेती के लिए ठण्ड का मौसम उपयुक्त होता है। क्योंकि शारद ऋतु के दौरान तापमान कम एवं हवा में नमी अधिक होती है। देश के पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों में बटन मशरुम की खेती रबी सीजन में की जाती है। इसके उत्पादन के लिए अक्टूबर – फरवरी माह तक की जलवायु उपयुक्त रहती है। फसल उत्पादन के लिए कवक जाल फैलाव के समय तापमान 22 – 25 डिग्री सेल्सियस और फलन के समय 14 – 18 डिग्री सेल्सियस तापमान एवं 80 -85 प्रतिशत नमी आवश्यक होती है।

 

Preparation of Compost  फसल की बिजाई के लिए खाद तैयार करने की विधि 

मशरुम को कृत्रिम विधि से तैयार की गयी खाद पर उगाया जाता है खाद दो प्रकार से तैयार किया जाता है -छोटी विधि एवं लम्बी विधि

छोटी विधि – इस तरीके से खाद तैयार करने में समय कम एवं पूंजी लागत अधिक आती है, जिसके कारण लघु स्तर पर मुशरूम के उत्पादन के लिए इसका उपयोग करना महँगा पड़ता है अतः लम्बी विधि से खाद तैयार करने का तरीका सामान्यतः अपनाया जाता है जो कि निम्नलिखित है –

लम्बी विधि –

सूत्र -1

क्रमांक  सामग्री  मात्रा (kg)
1 गेहूँ का भूसा 300
2 यूरिया 4.5
3 कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 9
4 सुपर फास्फेट  3
5 म्यूरेट ऑफ पोटाश 3
6 जिप्सम  15
7 गेहूँ का चोकर  20

 

सूत्र -2

क्रमांक  सामग्री  मात्रा (kg)
1 भूसा और पुआल (बराबर मात्रा) 300
2 यूरिया 
3 कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 9
4 गेहूँ का चोकर  25
5 जिप्सम  20
6 मैलाथियान  0.1प्रतिशत 

उपर्युक्त दोनों में से किसी एक सूत्र के अनुसार खाद तैयार किया जा सकता है

मिश्रण तैयार करना

भूसा तथा पुआल के मिश्रण को पक्के फर्श पर 48 घंटे तक थोड़े -थोड़े पानी का छिड़काव करने के माध्यम से गीला करते रहना है गीला करने के दौरान पैरों से दबाते रहना चाहिए फिर भूसे की ढेर बनाने के 16 -18 घंटे पहले जिप्सम और मैलाथियान को छोड़कर शेष बचे सभी सामग्री को पानी से गीला करें और गीली बोरी से ढक कर छोड़ दें 

मिश्रण का ढेर बनाना

गीले किये गए मिश्रण को 5 फुट चौड़ाई और 5 फुट ऊँचाई में ढेर बनाना है ढेर की लम्बाई मिश्रण के मात्रा पर निर्भर करेगी किन्तु चौड़ाई और ऊँचाई निर्धारित मात्रा से कम नहीं होनी चाहिए फिर इस ढेर को पाँच दिनों तक (ढेर बनाने वाले दिन को छोड़ कर) पड़े रहने देना है ऊपरी पर्त में नमि कम होने पर पानी के छिड़काव से गीला किया जा सकता है

पलटाई का क्रम

मिश्रण के ढेर की पहली पलटाई 6 वें दिन करनी है पलटाई करने के दौरान मिश्रण के पुरे हिस्से की अच्छी तरह पलटाई करनी है जिससे खाद में नमी की कमी न रह जाए नमि की कमी महसूस होने पर आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव किया जा सकता है इसके बाद पहले बताई गयी माप के अनुसार ढेर बनाकर छोड़ देना है इसी प्रकार प्रत्येक बार पलटाई करने के बाद माप के अनुसार ढेर बनाते रहना है

दूसरी पलटाई 10 वें दिन

तीसरी पलटाई 13 वें दिन करनी है इस बार पलटाई के दौरान मिश्रण में जिप्सम भी मिला देना है

चौथी पलटाई 16 वें दिन

पाँचवी पलटाई 19 वें दिन

छठी पलटाई 22 वें दिन करनी है इस बार पलटाई के दौरान मैलाथियान का छिड़काव खाद में करना है 

सातवीं पलटाई 28 वे दिन करनी है इस बार खाद में नमी एवं अमोनिया का परिक्षण करना है

नमी का परिक्षण करने के लिए खाद को मुठ्ठी में लेकर दबाते हैं यदि दबाने के दौरान हथेली और उँगलियाँ गीली हो जाएं किन्तु पानी निचुड़ कर न निकले की दशा में नमी का स्तर उपयुक्त होता है इस प्रकार के खाद में नमी का स्तर 6 8 – 70 प्रतिशत होता है

अमोनिया का परिक्षण करने के लिए खाद सूंघने पर यदि गौशाला पशु के मूत्र जैसी गंध आये, तो तीन दिनों के अंतराल में एक या दो पलटाई करने की आवश्यकता होती है अमोनिया की गंध एकदम समाप्त हो जाने पर खाद को 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ देना है इसके बाद बिजाई का कार्य शुरू किया जाता है

Mushroom Spawn  बिजाई 

अब खाद में बीज को मिलाना है बीज मिलाने से पूर्व ध्यान रखना है कि बीज सफेद एवं रेशमी कवक जालयुक्त हो और किसी प्रकार की अतिरिक्त गंधयुक्त न हो

बिजाई वाले स्थान एवं बिजाई में प्रयोग होने वाले बर्तन को 2 % फर्मीलीन घोल से धोना है और बिजाई करने व्यक्ति को साबुन से हाथों को धोना है जिससे खाद में किसी प्रकार के संक्रमण से बचाव सुनिश्चित किया जा सके

इसके बाद 100 किलोग्राम खाद में 10 किलोग्राम बीज के हिसाब से खाद और बीज का मिश्रण तैयार करें

बिजित खाद को पॉलीथिन थैलों में भरकर कमरे में रखना

हवादार कमरे में बाँस, लोहे अथवा मजबूत लकड़ी की  आलमारी की रैक की तरह संरचना तैयार  करें प्रत्येक रैक की ऊँचाई 2 फुट रखते हुए मचान तैयार करना है

फिर बिजाई से दो दिन पहले कमरे की फर्श को 2 % फर्मीलीन घोल से धोयें और दीवारों एवं छत पर  घोल का छिड़काव करें इसके प्रक्रिया के पूरा होते ही कमरे की खिड़कियों एवं दरवाजों को इस प्रकार बंद करें कि अंदर की हवा बाहर न जा सके

इसके बाद मचान की प्रत्येक रैक पर पॉलीथिन की चादर बिछाकर ट्रे का रूप दें इन सभी ट्रे पर 3 -4 इंच मोटी खाद की पर्त बिछा दें

फिर सामान मात्रा में सभी ट्रे में बीज का छिड़काव करने के बाद बीज को 1 -1 .5 इंच मोठे खाद की पार्ट से ढँक दें फिर ऊपरी सतह पर विसंक्रमित कागज बिछा दें

कमरे की नमी को बिजली चलित कूलर या हीटर लगाकर नियंत्रित किया जा सकता है नमी कम होने पर कमरे की दीवारों पर पानी का छिड़काव एवं फर्श पर पानी भरने के माध्यम से किया जा सकता है

Casing Mixture Preparation and Mounting on Casings केसिंग मिश्रण तैयार करना एवं केसिंग पर चढ़ाना 

बिजाई के 12 -15 दिनों बाद कवक जाल /बीज के तंतु खाद में फैल जाने पर खाद का रंग गहरे भूरे से बदलकर फूफूंद जैसा सफ़ेद हो जाता है। इस दौरान खाद को केसिंग मिश्रण की पर्त से ढँकना होता है।

केसिंग मिश्रण दो वर्ष पुरानी गोबर की खाद एवं दोमट मिटटी को मिश्रित करके तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को फर्मीलान घोल से उपचारित करने के बाद खाद के ऊपर चढ़ा दिया जाता है। फिर पॉलीथिन की चादर से ढँक देते हैं।

केसिंग पर्त में कवक जल फ़ैल जाने के बाद कमरे का तापमान 22 -25 डिग्री सेल्सियस से घटाकर 14 -18 डिग्री सेल्सियस पर ले आना चाहिए।

अब मशरुम की छोटी -छोटी कलिकाएं बननी शुरू हो जाती हैं, जो कि जल्दी ही परिपक्व मशरुम के रूप में तैयार हो जाती हैं। इस दौरान कमरे की खिड़कियां, रोशनदान एवं दरवाजे सुबह -शाम कुछ देर के लिए खोल देना चाहिए। जिससे कमरे में हवा का आवागमन हो सके।

Mushroom harvesting and Storage  मशरुम की तुड़ाई एवं भण्डारण

जब मशरुम टोपी का आकार 2 -3 सेमि हो एवं छत्रक न बना हो यानि टोपी बंद हो, तो फसल तैयार  समझना चाहिए अब मशरुम को घुमाकर तोड़ लेना चाहिए।

तोड़ने के बाद इसे तुरंत उपयोग में लाना आवश्यक है। क्योंकि ये जल्दी खराब हो जाती है। सामान्य तापमान पर इसे 12 घंटे तक और फ्रीज में  2 -3 दिनों तक स्टोर किया जा सकता है। इससे लम्बे समय तक स्टोर करने के लिए नमक के घोल में मशरुम को रखा जाता है।

परिपक्व मशरुम को प्रतिदिन तोड़ कर उपयोग में लाया जाता है। इस प्रकार लगभग 8 -10 सप्ताह में मशरुम की पूरी पैदावार प्राप्त हो जाती है।

 Income आमदनी 

1 क्विंटल कम्पोस्ट से औसतन 25 -30 किलोग्राम मशरुम की उपज प्राप्त होती है। बटन मशरुम की उपज तैयार करने में 25 -30 रु प्रति किलोग्राम खर्च आता है। जबकि रु 40 -50 रु  प्रति किलोग्राम मुनाफा होता है।

 

 

mushroom ki kheti , button mushroom, बटन मशरुम की खेती कैसे करें, climate for farming, jalvayu evam taapmaan, casing mishran taiyar karna, harvesting and storage, kheti se income, prepration of compost, khad taiyar karna, bijai ki taiyaari, mushroom spawning, krishi, kheti kisani, farming

 

 

 

अन्य लेख पढ़ें

आलू की खेती कैसे करें