Goat Disease Symptoms And Treatment बकरियों में होने वाले रोग के रोकथाम की जानकारी

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Goat Disease Symptoms And Treatment बकरियों में होने वाले रोग के रोकथाम की जानकारी

सीमांत, लघु किसान एवं पशुपालको के लिए बकरी पालन व्यवसाय कम लागत में आमदनी का सबसे अच्छा जरिया है। बकरी पालन में कम खर्च आता है। जिसके कारण बकरी को गरीब किसानों एवं पशुपालको की गाय भी कहा जाता है। बकरी के दूध, माँस, चमड़ा एवं ऊन से आय प्राप्त किया जा सकता है। बकरी छोटा जानवर होने कारण मनुष्य के संग आराम से कम जगह में पाली जा सकती है। इसके खाने पर प्रतिदिन रु 7-8 तक क खर्च आता है। इसके पालन -पोषण के लिए अलग से चारा की व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होती है। बकरी खेतों में झाड़ियों की पत्तियाँ, रसोईं की बेकार सब्जियों-फलों के छिलके, भोजन आदि खाकर पल जाती है। इसी कारण ग्रामीण इलाकों मं गरीब लोग बकरी पालन व्यवसाय से ज्यदातर जुड़े होते हैं। बकरी पालन में कम खर्च आता है, जबकि बाज़ार में बेचने पर ज्यादा कीमत प्राप्त होती है। अतः किसान और पशुपालको के लिए आवश्यक बकरी में होने वाले रोग के लक्षण की पहचान और समय पर रोग का उपचार करने से सम्बंधित जानकारी से अवगत होना। जिससे उन्हें बकरी पालन में आने वाली परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। तो आइये जाने बकरियों में होने वाले रोग और उसके रोकथाम की जानकारी।

 Goats Disease  बकरियों में होने वाले रोग

बकरियों में सामान्यतः निम्नलखित रोग पाए जाते हैं :

  • ओरफ रोग 

इस रोग को मुँहा भी कहा जाता है। इस रोग में बकरी के मुँह, खुरों या होंठ पर छाला हो जाता है। होठ या मुँह पर छाला होने से खाने में परेशानी और खुरों पर छाला होने पर बकरी लंगड़ा कर चलने लगती है।

बकरी में होने वाले ओरफ रोग का उपचार

यदि बकरी के मुँह, होंठ या खुरों पर छाला हुआ हो, तो पानी में हल्का सा फिनायल/डेटोल या लाल दवा मिलाकर दिन में दो -तीन बार छाले को धोना चाहिए। इसके बाद लोरेक्सन अथवा बीटाडाईन मरहम लगाना चाहिए।

  • निमोनिया रोग

इस रोग से ग्रस्त होने पर बकरी के नाक से तरल पदार्थ निकाल, मुँह खोलकर साँस लेने में परेशानी, शरीर का तापमान बढ़ जाय, बकरी जुगाली करना बंद करके सुस्त हो जाय। तो इसे निमोनिया रोग का संकेत समझना चाहिए।

रोग का उपचार

गर्म पानी में तारपीन के तेल की कुछ बूंदे डालकर बकरी भाँप देना चाहिए। इसके अतिरिक्त ठण्ड के मौसम में रोग ग्रस्त बकरी को सूखे नमी रहित स्थान पर शेड में रखना चाहिए।

  • फड़किया रोग

इस रोग के निम्न लक्षण होते हैं :

  •  खाना- पीना छोड़ देना
  • चक्कर आना
  • खुनी दस्त होना

इस रोग की पहचान न होने पर बकरी की मौत 36 घंटे के अन्दर हो जाती है। इस रोग का कारण भोजन में बदलाव या अधिक मात्र में चारा खाना है।

रोग का उपचार

रोगी बकरी को आधा कप पानी में लाल दवा की एक -दो दाने को घोलकर पिला देना चाहिए। गर्भवती बकरी को महीने के गर्भधारण के अंतिम महीने और तीन महीने से अधिक उम्र के बकरी के बच्चे को टीकाकरण करवा कर बमारी से बचाव किया जा सकता है।

  • प्लेग रोग 

ये विषाणु जनित रोग है  इस रोग के निम्न लक्षण होते हैं :

  • नाक और आँख से स्त्राव होना
  • भूख न लगना
  • दस्त होना
  • शरीर का तापमान बढ़ना
  • साँस लेने में परेशानी

शरीर का तापमान 3-4 दिनों तक बना रहने पर  दस्त शुरू हो जाती है। फिर एक सप्ताह के अन्दर बकरी की मौत हो जाती है। इस रोग का एकमात्र इलाज टीकाकरण है।

  • चेचक रोग 

ये भी विषाणु जनित रोग है इस रोग में थन, मुँह, नाक, पिछली टांगों के बीच छाले बन पड़ जाते हैं। जिसके कारण पशु को बहुत खुजली होती है। इन छालों के झड़ने पर पशु की त्वचा पर निशान रह जाते हैं। इस रोग का इलाज समय पर टीकाकरण है।

  • खुरपका -मुंहपका 

यह भी विषाणु जनित रोग है इस रोग के मुख्य लक्षण निम्न है :

  •  मुँह और खुरों के बीच छाले बनना
  • लंगड़ा कर चलना
  • भोजन न करना
  • गर्भपात हो जाना

रोग का उपचार

पशु के मुँह पर पड़े छाले पर फिटकरी का घोल और खुरों के छाले पर नीला थोथा का घोल लगाना चाहिए। इस बीमारी से बचाव के लिए प्रति 6 महीने पर बकरी का टीकाकरण करवाना चाहिए।

  • थनेला रोग

इस रोग के लक्षण निम्न हैं-

  • बक्त्री के दूध में फाटे दूध के थक्के जमना
  • थन में सूजन आना
  • बुखार आना

रोग का उपचार

इस रोग में बकरी के रहने की जगह की साफ़ -सफाई पर धयान देना चाहिए। इसके अतिरिक्त एंटीबायोटिक दवा को इंजेक्शन के द्वारा थनों में डालना चाहिए।

बकरी की बीमारी और रोकथाम की विस्तृत जानकारी लके लिए लिंक पर क्लिक करिए।

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