औषधीय पौधा एलोवेरा फायदे की खेती | Alovera Ki Kheti Kaise Kare Hindi Me Jane

घृतकुमारी जिसे ग्वारपाठा एवं एलोवेरा के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन समय से ही चिकित्सा जगत में बीमारियों को उपचारित करने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है। घृतकुमारी के गुणों से हम सभी भली-भांति परिचित हैं। हम सभी ने सीधे या अप्रत्यक्ष रुप से इसका उपयोग किसी न किसी रुप में किया है। घृतकुमारी में अनेकों बीमारियों को उपचारित करने वाले गुण मौजूद होते हैं। इसीलिए ही आयुर्वेदिक उद्योग में घृतकुमारी की मांग बढ़ती जा रही है। एक बार लगाने पर तीन से पाँच साल तक उपज ली जा सकती है। और इसे खेत की मेड पर भी लगा सकते है जिसके कई फैदे है एक आप के खेत में कोई आवारा पशु नही आएगा | आपके खेत की मेडबंधी भी हो जाएगी एलोवेरा को कोई जानवर भी नही खाता है आप को अतिरिक्त आमदनी हो जाएगी |

Aloe Vera

मृदा एवं जलवायु:
प्राकृतिक रूप से इसके पौधे को अनउपजाऊ भूमि में उगते देखा गया है। इसे किसी भी भूमि में उगाया जा सकता है। परन्तु बलुई दोमट मिट्टी में इसका अधिक उत्पादन होता है।उन्नतशील प्रजातियाँ: केन्द्रीय औषधीय सगंध पौधा संस्थान के द्वारा सिम-सीतल, एल- 1,2,5 और 49 एवं को खेतों में परीक्षण के उपरान्त इन जातियों से अधिक मात्रा में जैल की प्राप्ति हुई है। इनका प्रयोग खेती (व्यवसायिक) के लिए किया जा सकता है।
पौध रोपाई:
भूमि की एक-दो जुताई के बाद खेत को पाटा लगाकर समतल बना लें। इसके उपरान्त ऊँची उठी हुई क्यारियों में 50&50 सेमी की दूरी पर पौधों को रोपित करें। पौधों की रोपाई के लिए मुख्य पौधों के बगल से निकलने वाले छोट छोटे पौधे जिसमें चार-पाँच पत्तियाँ हों, का प्रयोग करें। लाइन से लाइन की दूरी 50 एवं पौधे से पौधे की दूरी 50 रखने पर 10,000 पौधों की आवश्यकता रोपाई के लिए होगी। सिचिंत दशाओं में इसकी रोपाई फरवरी माह में उतम होती है वैसे आप कभी भी इसे लगा सकते हो |
खाद एवं उर्वरक:
10-12 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद पौधे के अच्छे विकास के लिए आवश्यक है। 120 किग्रा. यूरिया, 150 किग्रा. फास्फोरस एवं 33 किग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। नाइट्रोजन को तीन बार में एवं फास्फोरस व पोटाश को भूमि की तैयारी के समय ही दें। नाइट्रोजन का पौधों पर छिड़काव करना अच्छा रहता है।
सिंचाई:

पौधों की रोपाई के बाद खेत में पानी दें। (घृतकुमारी) की खेती में ड्रिप एवं स्ंिप्रकलर सिंचाई अच्छी रहती है। प्रयोग द्वारा पता चला है कि समय से सिंचाई करने पर पत्तियों में जैल का उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार वर्ष भर में 3-4 सिंचाईओं की आवश्यकता होती है।
रोग एवं कीट नियन्त्रण:
समय-समय पर खेत से खरपतवारों को निकालते रहें। खरपतवारों का प्रकोप ज्यादा बढऩे पर खरपतवारनाशी का भी प्रयोग कर सकते हैं। ऊँची उठी हुई क्यारियों की समय समय पर मिट्टी चढ़ाते रहें। जिससे पौधों की जड़ों के आस-पास पानी के रूकने की सम्भावना कम होती है एवं साथ ही पौधों को गिरने से भी बचाया जा सकता है। पौधों पर रोगों का प्रकोप कम ही होता है। कभी-कभी पत्तियों एवं तनों के सडऩे एवं धब्बों वाली बीमारियों के प्रकोप को देखा गया है। जो कि फफूंदी जनित बीमारी है। इसकी नियंत्रण के लिए मैंकोजेब, रिडोमिल, डाइथेन एम-45 का प्रयोग 2.0-2.5 ग्राम/ली. पानी में डालकर छिड़काव करने से किया जा सकता है। ग्वारपाठा के पौधों को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है, परंतु खेत में हल्की नमी बनी रहे व दरारें नहीं पड़ना चाहिए। इससे पत्तों का लुबाब सूख कर सिकुड़ जाते हैं। बरसात के मौसम में संभालना ज्यादा जरूरी होता है। खेत में पानी भर जाए तो निकालने का तत्काल प्रबंध करें। लगातार पानी भरा रहने पर इनके तने (पत्ते) और जड़ के मिलान स्थल पर काला चिकना पदार्थ जमकर गलना शुरू हो जाता है।

फसल की कटाई एवं उपज:
रोपाई के 10-15 महिनों में पत्तियाँ पूर्ण विकसित एवं कटाई के योग्य हो जाती हैं। पौधे की ऊपरी एवं नई पत्तियों की कटाई नहीं करें। निचली एवं पुरानी 3-4 पत्तियों को पहले काटना/तोडें। इसके बाद लगभग 45 दिन बाद पुन: 3-4 निचली पुरानी पत्तियों की कटाई/तुड़ाई करें। इस प्रकार यह प्रक्रिया तीन-चार वर्ष तक दोहराई जा सकती है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग प्रतिवर्ष 50-60 टन ताजी पत्तियों की प्राप्ति होती है। दूसरे एवं तीसरे वर्ष 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। यदि ग्वारपाठे के एक स्वस्थ पौधे से 400 ग्राम (मिली) गूदा भी निकलती है

कटाई उपरान्त प्रबंन्धन एवं प्रसंस्करण :
विकसित पौधों  से निकाली गई, पत्तियों को सफाई करने के बाद स्वच्छ पानी से अच्छी तरह से धो लिया जाता है, जिससे मिट्टी निकल जाती है। इन पत्तियों के निचले सिरे पर अनुप्रस्थ काट लगा कर कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं, जिससे पीले रंग का गाढ़ा रस निकलता है। इस गाढ़े रस को किसी पात्र में संग्रह करके वाष्पीकरण की विधि से उबाल कर, घन रस क्रिया द्वारा सुखा लेते है। इस सूखे हुए द्रव्य को मुसब्बर अथवा  सकोत्रा, जंजीवर, केप, बारवेडोज एलोज एवं अदनी आदि अन्य नामों से से विश्व बाजार में जाना जाता है। (घृतकुमारी) की जातिभेद एवं रस क्रिया में वाष्पीकरण की प्रक्रिया के अन्तर से मुसब्बर के रंग, रूप, तथा गुणों में भिन्नता पाई जाती है।

75 Comments

  1. Hildred June 27, 2021
  2. Cherly Olewine June 1, 2021
  3. Scottie Dammrich May 30, 2021
  4. Ethan Palumbo May 30, 2021
  5. Joaquin Warehime May 29, 2021
  6. Dexter Harts May 28, 2021
  7. Fermin Preissner May 22, 2021
  8. Kerry Dutch May 21, 2021
  9. Jacqueline Turansky May 20, 2021
  10. Patrice Tromley May 19, 2021
  11. Darcie Cely May 18, 2021
  12. Anabel Vienneau May 17, 2021
  13. Luna Kerss May 17, 2021
  14. Danilo Swem May 12, 2021
  15. Loida Barthen May 10, 2021
  16. lace front wigs January 25, 2021
  17. wigs January 1, 2021
  18. Azure DevOps December 19, 2020
  19. Whatsapp status November 2, 2020
  20. The SEO November 2, 2020
  21. Driver Booster November 1, 2020
  22. Adguard Premium November 1, 2020
  23. Get fit October 29, 2020
  24. Ascendantny October 28, 2020
  25. best checkers strategy October 27, 2020
  26. Cape Coral Florida October 26, 2020
  27. Additional Reading October 26, 2020
  28. 人気化粧品通販 October 25, 2020
  29. Cherry Audio October 25, 2020
  30. Disney board games October 25, 2020
  31. umbrella companies in eu October 24, 2020
  32. Servpro October 23, 2020
  33. khosim.com October 23, 2020
  34. best medium roast coffee October 22, 2020
  35. john dogan software October 20, 2020
  36. Check this Website October 18, 2020
  37. STARS 295 October 15, 2020
  38. lanyard printer singapore October 13, 2020
  39. Karisa Schuffert October 12, 2020
  40. booking October 7, 2020
  41. The Plumber Inc October 4, 2020
  42. Chong Antonini October 2, 2020
  43. Gram Videos October 2, 2020
  44. Grady Lejeune October 1, 2020
  45. Abbey Rieff September 30, 2020
  46. Additional information September 29, 2020
  47. Monkey Kinetics September 28, 2020
  48. Wilhemina Golbin September 28, 2020
  49. Orlando AC Repair September 27, 2020
  50. Diamond Rehab Thailand September 22, 2020
  51. Gabriel Sisk September 21, 2020
  52. www.seducemujeres.com September 19, 2020
  53. Consuela Burzynski September 17, 2020
  54. Frederick Linthicum September 16, 2020
  55. Fat Fish August 3, 2020
  56. YouTube video maker August 1, 2020
  57. Swat Mosquito Systems August 1, 2020
  58. Branch Right July 30, 2020
  59. 1st Counsel July 30, 2020
  60. Ef Deco July 29, 2020
  61. Extreme Green July 28, 2020
  62. cbd products July 20, 2020
  63. cbd vape juice July 18, 2020

Leave a Reply