New Income Tax Rules-2018-19 इनकम टैक्स के नए नियम-2018-19

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इनकम टैक्स के नियम में बदलाव

New Income Tax Rules-2018-19 इनकम टैक्स के नए नियम-2018-19

सभी भारतीय नागरिक के लिए आयकर नियमों की जानकारी रखना आवश्यक है। यदि आपकी इनकम टैक्स के दायरे में आती है तो सरकार को आयकर देकर आप भी देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।
वित्तीय वर्ष 2018-19 से आयकर के नियमों में बदलाव किया गया है। इन नियमों में बदलाव पुराने इनकम टैक्स स्लैब के हीं तहत किये गए हैं। अपनी आय के निवेश की प्रक्रिया का निर्धारण करने के लिए आपके लिए नए इनकम टैक्स नियम की जानकारी आवश्यक है। अतः आइये जाने इस लेख के माध्यम से आयकर के नए नियम।

1अप्रैल 2018-19 वित्तीय वर्ष से लागू इनकम टैक्स नियम 1 April 2018-19 Financial Year se applicable Income Tax Rules

  • Long Term Capital Gain (LTCG) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन लागू किया गया है। इक्विटी , म्युचुअल फंड, SIP आदि के शेयर में दीर्घकालिक निवेश से प्राप्त होने वाले लाभ पर इनकम टैक्स देना होगा। इन शेयरों में निवेश से प्राप्त रूपए 1 लाख से ज्यादा लाभ पर 10% LTCG टैक्स देना होगा। यानि इस प्रकार के निवेश से प्राप्त लाभ में से रूपए 1 लाख निकालने के बाद शेष रकम का 10% टैक्स देना होगा।
  • इक्विटी म्यूच्यूअल फंड पर 10% डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डी डी टी टैक्स) लागू कर दिया गया है। हालाँकि डी डी टी टैक्स फंड हाउस कंपनी द्वारा जमा किया जाता है। कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को डिविडेंड का लाभ देने के पूर्व हीं यह टैक्स काट लेती है।
  • दो वर्ष तक रियल स्टेट प्रॉपर्टी पर मालिकाना अधिकार रखने के बाद बिक्री करने से प्राप्त राशि पर टैक्स न देने के लिए, उस रकम को 54EC के अंतर्गत सूचीबद्ध बांड्स में कम से कम 5 वर्ष के लिए निवेश करना होगा। पहले कैपिटल गेन को 3 वर्ष के लिए निवेश करने पर टैक्स नहीं देना होता था।
  • वेतन पाने वाले कर्मचारियों की आयकर में रूपए 40,000 स्टैण्डर्ड टैक्स डिडक्शन का बेनिफिट प्राप्त होगा। अब से पहले ट्रांसपोर्ट भत्ता एवं मेडिकल भत्ता का लाभ दिया जाता था। स्टैण्डर्ड टैक्स डिडक्शन का सीधा फायदा पेंशन प्राप्त कर रहें सीनियर सिटीजन को मिलेगा।
  • सीनियर सिटीजन को फिक्स्ड डिपाजिट (FD) और रेकरिंग डिपाजिट (RD) से प्राप्त रूपए 50 हज़ार तक के ब्याज को करमुक्त कर दिया गया है।
  • सेक्शन 80डी के तहत सीनियर सिटीजन स्वस्थ बीमा पालिसी के प्रमियम और मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर रूपए 50 हज़ार कर दिया गया है। अभी तक रूपए 30 तक के टैक्स की छूट दी जाती थी।
  • इंडिविजुअल करदाताओं को स्वास्थ और शिक्षा सेवा के लाभ पर 4% उपकर (सेस) देना होगा। अभी तक सेस टैक्स 3% देना होता था।
  • यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय रूपए 30 हज़ार है और वह इक्विटी लिंक्ड बचत योजना के तहत रूपए 50 हज़ार तक का स्वास्थ बीमा योजना स्वयं या परिवार के लिए लेता है। जिसके प्रीमियम के तौर पर रूपए 30 हज़ार देता है। तो इस दशा में आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
  • प्रधानमंत्रीवय वंदन योजना के तहत वरिष्ट नागरिक बीमा पालिसी में अधिकतम निवेश की सीमा रूपए 7.5 लाख से बढ़ाकर रूपए 15 लाख कर दी गई है।

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