प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ( Pradhanmantri Krishi Sinchai Yojana) की पूरी जानकारी हिन्दी में

माननीय राष्ट्रपति श्री प्राणव मुखर्जी ने 16 वें लोकसभा में संबोधन के दौरान जल के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा, ‘जल का प्रत्येक बूंद अनमोल है सरकार को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता है।  इस समस्या से निपटने हेतु हमें बारिश के पानी के संरक्षण हेतु प्रयास करना होगा। ऐसा करने से भूगर्भ के जलस्तर को कम होने से बचाया जा सकता है। तथा खेतों में सिंचाई हेतु पानी की कमी पूरा करने में मद्द मिल सकेगी।

जल संरक्षण को प्राथमिकता देने  हेतु हमारा सिद्धांत होना चाहिए ‘जल संचय और जल संरक्षण’।इसे योजनाबद्ध तरीके से कार्यरूप में  परिणित करने हेतु केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री योजना के तहत ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का सूत्रपात किया। कृषि क्षेत्र में जल तथा जल संरक्षण के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता फ़ैलाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के साथ स्लोगन (slogan) ‘जल संचय और जल संरक्षण’, ‘प्रत्येक बूंद ज्यादा फसल’(‘Per Drop More Crop’), ‘हर खेत को पानी’ जारि किये गए।

 

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य (Objective Of Pradhanmantri Krishi sinchai Scheme)

  • इस योजना के तहत खेतों में सिंचाई की समस्या के निदान हेतु जल संरक्षण साधनों के निर्माण का क्रियान्वयन जिला स्तर और उपजिला स्तर करना है। ताकि देश के प्रत्येक कृषि क्षेत्र को पानी उपलब्ध हो सके।
  • उपलब्ध जल स्त्रोतों को आपस में जोड़ना, जिससे जिन क्षेत्रों में सिंचाई हेतु पानी स्त्रोतों की कमी है। उन खेतों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके।
  • सिंचाई के आधुनिक तकनीक का उपयोग करके कम पानी में ज्यादा खेतों की सिंचाई करने के साधनों का विस्तार करना।
  • जिन क्षेत्रों में भूमिगत जल उपलब्ध है, वहाँ नलकूपों का निर्माण करवाना और बारिश के पानी के संरक्षण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) का उपयोग करके ‘हर खेत को पानी’ के सिद्धांत को हकीकत में बदलना।
  • जल के बूंद-बूंद का उपयोग करने हेतु ‘Per Drop More Crop’ (प्रत्येक बूँद ज्यादा फसल) के सिद्धांत को जमीनी हकीकत में   बदलने के उद्देश्य से खेतों की सिंचाई में नगरपालिका के बेकार पानी का उपयोग खेतों के सिंचाई में करने के साधनों का विकास करना है।
  • कृषि क्षेत्र में निजि निवेशों को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करना ताकि आधुनिक तकनीकी साधनों के उपयोग के द्वारा फसलों की पैदावार को बढ़ाया जा सके।

इस योजना के क्रियान्वयन हेतु कार्यक्रम की रणनीत

Program strategy for implementation of the scheme

  • इस योजना के तहत सिंचाई की सुविधा का लाभ देश के सभी क्षेत्रों में पहुँचाने हेतु इस योजना को राज्य स्तर की योजना तथा जिला स्तर की योजना में बाँटा गया है। ताकि कोई कृषि योग्य भूमि सिंचाई की आधुनिक सुविधा के लाभ से वंचित न रह जाये।

1.राज्य स्तर पर योजना के क्रियान्वयन, निगरानी तथा परियोजना की मंजूरी की जिम्मेदारी राज्य के मुख्य सचिव की होगी। योजना हेतु फंड केंद्र सरकार द्वारा दिया जायेगा। राज्य सरकार को योजना से सम्बंधित  विस्तृत जानकारी केंद्र सरकार को देनी होगी।

 

  1. जिला स्तर पर योजना का क्रियान्वयन जिलाधिकारी और अन्य विभागों के अध्यक्ष जैसे जिला वन अधिकारी, योजना के तहत निर्धारित बैंक अधिकारी आदि के नेतृत्व में योजना की रूपरेखा तैयार की जाएगी। जिलाधिकारी को योजना का ब्यौरा राज्य सरकार को देना होगा।

 

 

  • इस योजना का लक्ष्य(Motto of This Scheme)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना द्वारा देश के सभी कृषि क्षेत्रों तक जल की उपलब्धता तथा जल संरक्षण, उचित फसल प्रबंधन तथा सिंचाई की आधुनिक तकनिक के प्रयोग से किसानों को अवगत कराने हेतु निम्नलिखित तीन मुख्य बिन्दुओं का निर्धारण किया गया है।

  1. हर खेत को पानी (Har Khet ko Pani):

इसके अंतर्गत बारिश के पानी का संरक्षण कर उसका  सिंचाई हेतु उपयोग, पुराने जल स्त्रोतो को सुदृढ़ करना तथा जिन क्षेत्रों में भूमिगत जल उपलब्ध है, वहाँ नलकूपों का निर्माण और उपलब्ध जल स्त्रोतों को एक-दुसरे से जोड़ना आदि के द्वारा प्रत्येक कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना है।

  1. प्रत्येक बूंद ज्यादा फसल (Per Drop More Crop):

इसके अंतर्गत फव्वारा सिंचाई, ड्रिप इर्रिगेसन आदि विधियों का प्रयोग सिंचाई में आवश्यकता अनुसार करना तथा पानी के बहाव पर नियंत्रण कर फसलों के आवश्यकता अनुसार पानी का उपयोग करना आदि तकनीकी जानकारी से किसानों को अवगत कराना है। जिससे कम पानी में ज्यादा खेतों की सिंचाई हो सके। नगरपालिका के बेकार पानी का उपयोग कृषि सिंचाई में करने की सुविधा का प्रबंध करना आदि।

  1. वाटरशेड डेवलपमेंट (Watershed Development)

  • खेतों की सिंचाई में जल के प्रवाह की मात्रा के नियंत्रण का प्रबन्ध,मिट्टी के उर्वरा शक्ति और नमी का संरक्षण, जल निकास की उचित व्यवस्था तथा बारिश के पानी का संरक्षण आदि जल आधिरित सुविधओं का समुचित प्रबन्ध करना।
  • जिन पिछड़े क्षेत्रों में बारिश ज्यादा होती है। उन क्षेत्रों के बारिश के पानी का भरपूर उपयोग करने हेतु ‘महात्मा गाँधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारेंटी स्कीम’ (MGNREGS) के साथ जोड़कर, पुराने जल स्त्रोतों को सुदृढ़ करना और कृत्रिम तकनीक के द्वारा जल संरक्षण की व्यवस्था करना आदि।

 

इस योजना से किसानों को लाभ (Benefits to farmers by this scheme):

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के द्वारा किसानों को आधुनिक तकनिकी विधियों द्वारा सिंचाई करने की जानकारी मिलेगी तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति, फसलों के उचित प्रबंधन और जल संरक्षण करने की विधियों का ज्ञान प्राप्त होगा। इस योजना के अंतर्गत फव्वारा सिंचाई, ड्रिप इरिगेशन आदि सिंचाई की विधियों से किसानों को अवगत कराया जायेगा। जिससे उनका पानी पर होने वाले खर्च में कमी होगी तथा आय में वृद्धि होगी।

 

इस योजना से सम्बन्धित अधिक जानकारी के लिए अथवा अपनी खेती की समस्या के निदान तथा  हेतु

 कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट का प्रयोग करें।

 

 

 

 

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